Monday, 15 May 2017

माँ ---- मगर क्या सार्थक है ये शब्द आज सब के दिल में --- ????????
सृजनकारी शक्ति रूप अर्पणा नारी माँ बन अपने अंश की खुशी के लिए सर्वस्व न्यौछावर करती तन-मन-धन ..........मगर हर पल हर रूप में अपने बच्चे का साथ देने वाली नारी इस युग में अंत वेला में तन्हा भटकती सुनने को तरसती है एक आवाज़ ..माँ ... माँ ......न जाने क्यों ... ?

माँ
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एक आह्लाद
बच्चे के तुतलाते
होठों से ...
निकला अस्फुट
शब्द रूप में
प्रथम .....
जीवन आलाप
मधुर सा
माँ ..............
थुपक-थुपक कर
नन्हें क़दमों को
शिक्षा की ओर
अग्रसर करती
अपने नैतिक
मूल्य निभाती
सखी सी माँ ...............
कर्मठता का
प्रतीक बन
पल-पल उसे
सह्लाती
देती सहारा
जीवन-पथ पर
स्नेहिल माँ ...............
प्रगति पथ पर
अपने अंश के
पल-पल
पाँव बढाती
फिर देख उसे
ऊँचाई पर
नीचे खड़ी
मुस्कुराती
अर्पणा माँ .........
मगर ........
न जाने क्यों ?
' मनस्वी '
अंत बेला के
अंतिम पड़ाव पर
अंतिम शब्द
अपने आत्मज़ के
सुनने को तरसती
रह जाती है
तन्हा .......
गुमसुम.....
उदास ......
वही चंचला
वही
समर्पित माँ .................. मनस्वी .....................

Monday, 16 January 2017


      नव वर्ष आगमन
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दिसम्बर माह की ठिठुरन में
" अंग्रेज़ी नव वर्ष " दिवस आया
सबके मुख पर खुशियां छायी
पीने पिलाने का दौर चलाया

अंग्रेजी ने रंग दिया तनमन
शोर शराबा चले संग संग
मनस्वी,,, भूल अपनी संस्कृति
सब ने बदले अपने रंग ढँग

आज भू ले हम भारत वासी
हिंदी पावन 'नव वर्ष बेला '
प्रकृति का संदेश न समझे
बस घर में ही लगता है मेला

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष को
अंकुरण हिन्दी नव बेला का
तन मन प्रफुल्लित उमंग भरा
प्राकृतिक सौंदर्य का मेला सा

खुशियां लाएं 'दो दिवस' मनाएं
हिन्दी को तो न ठुकराएँ
ये तो अपना मातृ दिवस है
इसके संग संग सब चलाये

भारत है तो  इण्डिया अच्छा है
संस्कृति है तो फैशन अच्छा है
मनस्वी,, बुज़ुर्गों का गर रखें मान
तो पीना पिलाना  भी  अच्छा है

बिना राग द्वेष के मिल के खाएं
नव वर्ष रूप में हैप्पी न्यू ईयर मनाएं

टिपणी ,, अपनी भारतीयता को जीवंत रखते हुए सभी त्यौहार मनाने चाहिए क्योंकि भारत की पहचान ही है कि विभिन्नता को एक सूत्र में बाँधना। यहाँ अनेकता में एकता है मगर अपनी संस्कृति को भूलते हुए नहीं बल्कि इसका मान बढ़ाते हुए सभी त्योहारो  को, दिवस को मनाना चाहिए ताकि भारतीय सबके साथ कदम से कदम मिला करआगे बढ़ सकें और अपनी भारतीयता की पहचान दे सके।





                   नम पलकें

कुछ धुली सी ..नम पलकें .. मुस्कुराते लब

कुछ अच्छी ..कुछ बुरी ..यादे .. भूलती कब

मनस्वी ..कुछ खोयी सी ..कुछ सोयी सी

आज न जाने क्यों याद आ रहा है ..सब ..  :)